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TUJHE SHARMILI BHABHI KA VASTA AAGE BADHA KAHANI KOI
VERY NICE STORY KEEP IT UP |
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THIS ACT OF NOT GIVING UPDATES IS SHEER TORTURE
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#193
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gopher bro, where r u bro, r u all right, pl post remaining part & BTW Happy Deepawali to u & yr. family......
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#194
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abe woh iski sharmili bhabhi nahi nahi... woh ek laash thi jiske saath yeh sex karne ki kosish kar raha tha.... itni harkatein karne ke baad to ek chakke ki aankhen khul jaye
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#195
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chal tu nahi likh raha hai,to mai is kahani ko puri kar du.kyonki mujhe bahul khujal ho rahi hai
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#196
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Nice story Yaar ,Lekin yaar aadhi kahani mat chodo dusre din maza nahi aata.
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तुषार वहां से निकल कर अपने कमरे में आया कमरे में नाईट लैंप पहले ही जल रहा था, वो उसकी रोशनी में ही अपने कमरे में टहलने लगाऔर सोचने लगा जो अभी अभी वो अपनी ही सगी भाभी के साथ कर के आया था, उस निर्दोष स्त्री के गहन नींद में होने का अनुचित लाभ उठाते हुए उसने अपनी हवस का जो वहशीपन उसके साथ किया था उससे उसकी कामवासना तो शांत हुई लेकिन उसके अन्तर्मन का ताप बढ़ गया और अब वो उसे कचोटने लगा और अपनी कमजोरी पर पश्चाताप करने लगा। उसका मन उसे धिकारने लगा यही सोच सोच कर वो परेशान कमरे में टहलने लगा और सोच रहा था कि "आखिर मैं खुद पर नियंत्रण क्यों नही रख पाता, मैं उसे देख कर पागल क्यों हो जाता हूं ?" , बेचारी
सीधी साधी भाभी मैं उसके भोलेपन और शर्मिलेपन का अनुचित लाभ उठा रहा हूं। मेंरे भाई ने कितने विश्वास से उसे यहां रखा है, कितने विश्वास से वो मुझे ये कहता है कि उसे अपने साथ ले कर जाया कर घुमाया कर और मेंरे मां-बाप, बहिन सब मुझ पर कितना भरोसा करते हैं, और एक मैं हूं कि मैने सबके विश्वास को धोखा दिया है, सबके साथ दगाबाजी की है, छी: धिक्कार है मुझ पर।ऎसा सोचते हुए वो जब थक गया तो पलंग पर लेट गया और सोचते हुए ही वो कुछ ही क्षणों में नींद के आगोश में समा गया। इधर तुषार के कमरे से निकलते के लगभग डेढ़ मीनट के बाद रश्मी ने हौले से अपनी आंख खोली और अपनी अधखुली आंखों से धीरे से कमरे का जायजा लिया जब उसे पक्का यकीन हो गया कि उसका देवर तुषार उसके कमरे से जा चुका है तो वो झट से उठ कर पलंग पर बैठ गई और उसने शरीर का जायजा लिया। उसने देखा कि उसे गहन नींद में समझ कर कामवासना में अंधे हो चुके उसके देवर तुषार ने उसके सोते हुए जिस्म के साथ हवस का जो खेल खेला था और जिस तरीके से उसके कपड़ों को अस्त व्यस्त कर दिया था उसे देख उसे लगभग नंगी ही कहा जा सकता था।केवल कपड़े नहीं उतारे थे तुषार ने के,लेकिन उसके शरीर के किसी अंग को उसने अनछुआ नहीं रखा था और उसके शरीर के सभी अंगो का उसने काफ़ी करीब से मुआयना किया था और उसके जिस्म के भूगोल को अच्छी तरह से समझ गया था,शायद राज से भी ज्यादा। रश्मी ने अपने उपर एक नज़र ड़ाली,अपनी हालत देखते हुए उसे घोर लज्जा का अनुभव हुआ । उसके गाऊन के सभी बटन खुले हुए थे और उसके दोनों विशाल स्तन पूरी तरह अनावृत्त थे, उसका गाऊन कमर से उपर चढा हुआ था तथा उसकी दोनों मोटी चिकनी जांघे और उसके बीच दबी उसकी चूत साफ़ दिखाई दे रही थी। अपनी हालत देख कर वो सोच रही थी कि "कितनी बेरहमी से नोंच कर गया था उसका देवर उसका बदन"। अपने प्रति तुषार की हवस को काफ़ी समय से मह्सूस कर रही थी लेकिन वो इस हद तक जा सकता है ऎसा उसने सोचा भी नहीं था। जवानी के जोश में उसके कदम बहक गए हैं और उसकी अक्ल पर पत्थर पड़ गए लेकिन सुधा से शादी होते ही वो अपने रास्ते पर आ जायेगा और मेंरे प्रति उसका आकर्षण खत्म हो जायेगा ऎसा सोच कर और अपनी बहन की जिंदगी संवर जाये इस कारण वो चुपचाप सहती रही।लेकिन अब बात काफ़ी बढ़ चुकी थी और उसे साफ़ मह्सूस हो रहा था कि उसकी हरकतें अब और बढ़ेंगी। उसकी इसी उहापोह का नतीजा था कि वो खुल्लमखुल्ला उसके जिस्म को एक घंटे तक नोच कर अपनी हवस शांत करके चलता बना और उपर से उसकी ये हिमाकत की उसने अपना पूरा का पूरा वीर्य ही उसके सोते जिस्म में ड़ाल दिया। |
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#198
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दरअसल रश्मी तो उसी समय उठ चुकी थी जब तुषार ने उसकी चूत में मुंह लगाया था।लेकिन वासना में अंधे हो चुके मूर्ख तुषार को ये बात समझ नहीं आई कि वो भाभी के जिस अंग से खिलवाड़ कर रहा है और उसमें मुंह लगा जवानी का रस चूस रहा है वो किसी भी स्त्री के लिये ऎसा संवेदनशील अंग होता है जिसके प्रति एक स्त्री हमेंशा सजग रहती है।जो स्त्री अपने अबोध बालक की शक्तिहीन करुण पुकार मात्र से अपनी गहरी नींद का परित्याग कर उसे अपने सीने से लगा कर अपने मातृत्व और वात्सल्य के रस से उसकी भूख मिटाने के लिये हर क्षण तत्पर रहती हो उसे क्या अपनी चूत पर किसी (पराये)पुरुष के स्पर्श का आभास नहीं होगा?लेकिन मूर्खों को ये बातें कहां समझ आती है?
काम अपना प्रथम प्रहार इंसान के दिमाग पर ही करता है और उसके सोचने समझने की शक्ती को खत्म कर देता है और आचार-विचार विहीन मनुष्य मूर्ख ही होता है। जैसे ही तुषार ने रश्मी की चूत में मुंह लगाया था उसी क्षण उसकी नींद उड़ गई थी उसने मुंह उपर उठाया और देखा तो उसके होश उड़ गए। सामने उसका सगा देवर तुषार था जो बड़े ही अजीबो गरीब तरिके से अपना मुंह बना रहा था और परम संतोष के भाव के साथ उसकी चूत को चूस रहा था। चूत का रस पीने में वो इतना मशगूल था कि उसे तनिक भी अभास नहीं हुआ कि उसकी भाभी जाग चुकी है और उसकी चोरी पकड़ी जा चुकी है।उस एक क्षण में ही रश्मी के दिमाग में कई बातें कौंध गई और वो निढ़ाल पड़ी रही। वो चाहती तो उसी क्षण उठ कर उसे चांटा मार सकती थी या शोर मचा कर घर के सदस्यों को बता सकती थी लेकिन उसने सोचा ऎसा करने में खतरा ही खतरा है।हो सकता है तुषार उल्टा उस पर ही लांछन लगा दे और घर वालों ने यदि उसकी बात को सच मान लिया तो? यदि किसी ने पुछ लिया कि वो तेरे कमरे में घुसा कैसे? तो मैं क्या जवाब दूंगी ? कैसे खुद को निर्दोष साबित करुंगी? कौन है मेरे पक्ष में ? परिस्थितियां भी तो नहीं है मेरे पक्ष में। जब एक धोबी ने सीता जैसी देवी पर लांछन लगा दिया तो स्वयं भगवान श्रीराम ने ये जानते हुए कि सीता निर्दोष है उसे अग्नी परिक्षा का आदेश दिया ताकि युगों युगों तक लोगों को ये संदेश जाता रहे की देवी सीता पवित्र है। मुझे बचाने वाला कौन है यहां?निर्बल पुरुष न तो अपनी रक्षा कर सकता है न अपनी संपत्ति और न अपनी स्त्री ,कदाचित ईश्वर ही दया कर उसे बचाने आ जाए कुंती की तरह तो अलग बात है लेकिन रश्मी ने सोचा मेंरा चीरहरण तो इस तुषार ने कर ही ड़ाला है।मैं क्या जवाब दूंगी घर के लोगों को कि "तू नंगी होते तक क्यों चुप पड़ी रही?" Last edited by gopher : 7th November 2008 at 01:10 AM. |
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#199
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दूसरा खतरा ये था कि कहीं बात इतनी न बिगड़ जाय कि तुषार की सुधा से शादी ही टूट जाय अगर ऎसा हुआ तो मेंरा परिवार मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा। विशेषकर सुधा और मेंरी माँ। वो तो सीधा यही पूछेगी की बात इतनी कैसे बढ़ी की वो इतनी हिम्मत कर बैठा ? ताली एक हाथ से बजती है क्या ? कोई पुरुष किसी स्त्री को दो या तीन बार जाने अन्जाने स्पर्श का प्रयास कर सकता है बार बार नहीं। स्त्री की एक क्रोध भरी नजर ही किसी पुरुष को पस्त करने के लिये काफ़ी होती है। फ़िर यदि कोई पुरुष बार बार किसी स्त्री के साथ ऎसा करता है तो इसका मतलब साफ़ है कि इसमें उसकी भी रजामंदी है।
तीसरी परेशानी रश्मी की ये थी कि यदि इस वक्त उसने आंख खोली और दोनों की नजर मिली तो फ़िर दोनों के लिये ही जीवन भर एक दूसरे से नजर मिलाना संभव नहीं था। कम से कम रश्मी के लिये तो संभव था ही नहीं।और ऎसी अवस्था में तुषार से नजर मिलाने का साहस रश्मी में था ही नहीं। इसीलिये उसने इस शुतुरमुर्ग की तरह रेत में मुंह छुपा कर इस तूफ़ान को गुजर जाने देने में ही अपनी भलाई समझी और वो आंखे बंद किये पड़ी रही। अब तक उसके शरीर में लगाया हुआ तुशार का वीर्य सूखने लगा था और उसकी चमड़ी खीचाने लगी थी। उसने अपने चेहरे और स्तनों पर हाथ लगाया वहां एक परत सी बन गई थी। वो पलंग से उठी और कांच के सामने जा कर खड़ी हो गई और अपने जिस्म को निहारने लगी।उसने अपना गाऊन निचे गिरा दिया, अब वो नंगी कांच्के सामने खड़ी थी। उसने उसमे अपने बदन को देखते हुए अपना हाथ चूत में लगाया वहां लगाया हुआ तुषार का वीर्य अभी भी गीला था और उसे वहां चिपचिपा पन मह्सूस हो रहा था। वहां हाथ लगाते ही उसके हाथ में उसके हाथ में उसके देवर का वीर्य आ गया और उसका हाथ भी चिपचिपाने लगा। उसने दरवाजे की तरफ़ नजर उठाकर देखा वो अभी तक अधखुला था,वो तत्काल दरवाजे की तरफ़ दौड़ी और उसे अंदर से बंद किया। जवानी का लूटना किसी स्त्री के लिये दौलत लूट जाने से भी बड़ी घटना होती है। रश्मी दरवाजे के पास ही नंगी खड़ी हो कर पलंग की तरफ़ देख रही थी जहां अभी कुछ ही मीनटों पहले तुषार उसकी जवानी को लूट रहा था। उसने पलंग की तरफ़ देखते हुए अपार शर्म और लज्जा का अनुभव हो रहा था उसने अपने दोनों हाथों की हथेलियों से अपने चेहरे को ढ़क लिया और फ़फ़क कर रोने लगी। उसी तरह रोते हुए वो पलंग के पास गई और वहीं जमीन पर बैठ गई और पलंग पर अपना सर रख कर फ़फ़कने लगी। |
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#200
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रश्मी लज्जित थी और रो रही थी,उसे चुप कराने वाला वहां कोई नहीं था,हर गलत काम के समय कचोटने वाला उसका अन्तर्मन भी मौन था।दर असल वो अपनी ही अन्तरात्मा के सामने बेनकाब होने से लज्जित थी और फ़फ़क कर रो रही थी। उसके अन्तर्मन ने उसके राम,सीता,कुंती और सुधा की शादी वाले तमाम तर्कों को नकार दिया था और ये साबित कर दिया था कि जिस्मानी तौर पर तुषार के हाथों से नंगी होने से पहले ही वो चारित्रिक रुप से अपने ही अन्तर्मन के सामने उसी समय नंगी हो चुकी थी जब तुषार ने उसका गाऊन उठा कर उसकी चूत में मुंह लगा कर उसे चूसना शुरु किया था। किसी पुरुष के साथ संसर्ग की अपनी दमित इच्छा को अपने देवर से पूरी होते पा कर वो यूं ही निढ़ाल पड़ी रही और नींद का बहाना उसकी ढ़ाल का काम रहा था।
अब उसे इस बात की बेहद ग्लानी हो रही थी कि जब तुषार उसकी चूत को चूस रहा था तो कैसे रोमांचित हो रही थी और रोमांच में उसने कैसे अपने होठों को अपने दातों से काट लिया था। कहीं तुषार को उसके जागने का अभास ना हो जाय इस ड़र से वो संयत हो गई और आंख बंद किये पड़ी रही।फ़फ़कते हुए वो सोच रही थी कि कैसे जब तुषार ने उसकी चूत को चूसना बंद किया तो वो कितनी बुरी तरह से तड़्फ़ी थी और उसका मन किया था कि वो उठ कर उसके सर को फ़िर से उसकी जांघो के बीच में फ़ंसा कर उसकी चूत को चूसवाना चालू रखे।उसे अच्छी तरह से याद था कि जब वो हड़्बड़ा कर उठा और उसने देखा कि मेंरे खर्राटे की अवाज को बंद पाकर वो कैसे भय से पीला पड़ गया था तो उसने किस चतुराई से अपनी नाक से सीऽऽऽऽऽसीऽऽऽऽऽ कि अवाज निकाल कर उसे अपने सोते होने का अहसास करवाया था और अपने जिस्म से खेलते रहने के लिए उकसाया था। उसकी अन्तरात्मा ने साक्षी भाव से उसके तमाम मनोभावों देखा था और उसकी दमित कामवासना को मह्सूस किया था।उसने एक हंस की तरह दूध से पानी को अलग कर दिया था। और अपनी ही अन्तरात्मा का सामना करने का साहस रश्मी में नहीं था, खुद के ही सामने बेनकाब होने और अपनी कमजोरी पर नियंत्रण न रख पाने के कारण वो बेहद लज्जित थी और अपनी अन्तरात्मा के तीखे सवालों का जवाब न दे पाने के कारण वो फ़फ़क फ़फ़क कर रो रही थी। Last edited by gopher : 7th November 2008 at 01:06 AM. |